Monday, 13 February 2017

पड़ोस की भाभी मस्त माल : गाँव की चुदाई कहानी


बात उन दिनों की है जब मैं गाँव में रहता था, उस समय मेरी पड़ोस में एक नयी नहीं शादी हुई थी रिश्ते में वो भाई लगता था नाम था कौशल, शादी के कुछ दिन बाद यानी की ५ दिन बाद ही वो अपने काम पे यानी की दिल्ली लौट आया था! उनके घर में सिर्फ कौशल भैया की माँ और वाइफ ही रहने लगी थी. मैं कभी कभी उनके घर जाया करता था, और हसी मजाक भी होता था क्यों की वो भाभी थी, अक्सर मेरे यहाँ हसी मजाक देवर भाभी में होता है.
एक दिन जब मैं उनके घर गया गर्मी का दिन था वो अकेले ही घर पे थी उनकी सास अपने मायके गयी हुई थी एक दिन के लिए, पहले मैं आपको भाभी के बारे में बता दू भाभी करीब २१ साल की थी रंग गेहुआ चेहरा गोल, टाइट चूची गोल गांड और जब वो साड़ी पहनती तो वो नाभि की निचे सारे बांधती थी उनका गोल गोल पेट पे नाभि एक गदम सुराही के तरह पेट लगता था, लाल लाल होठ कस हुआ बदन. बहुत ही सेक्सी लगती थी. जब मैं उनके घर गया तो वो कुछ काम कर रही थी और मैं वही चारपाई पे बैठ गया, वो अपना काम खत्म करके वो कमरे में चली गयी और मुझे भी बोली अंदर ही आ जाओ बहार बरामदे पे बहुत धुल उड़ रहा है, मैं भी अंदर चला गया और वही बैठ गया, हम दोनों में बात चीत होने लगी वो बोल रही थी की मैं आपकी शादी अपने ही मायके में करवाउंगी एक बड़ी ही ख़ूबसूरत लड़की है मेरी चचेरी बहन लगती है, मुझे भी आनंद आ रहा था क्यों की किसी भी कुंवारे को शादी के बारे में बात करते अच्छा लगता है, फिर वो काफी देर इधर उधर की बात करने के बाद मैं जाने ही बल था की वो कमरे के दरवाजे पे ही बैठ गयी उनका आँचल सरका हुआ था ब्लाउज टाइट होने की वजह से उनका चूच ऊपर से निकलने की कोशिश कर रहा था, ये सब देख के मेरा लैंड खड़ा हो गया मैं थोड़ा शर्मा भी रहा था क्यों की लग रहा तो अगर वो देख लेगी तो कैसा लगेगा, क्यों की मेरे लैंड का उभर पता चल रहा था.

मैं जैसे ही दरवाजे से निकलने की कोशिश किया मैंने कहा भाभी थोड़ा पैर हटाना वो थोड़ा और भी चौड़ी होकर बैठ गयी फिर मैंने उनको फिर कहा वो मुस्कुरा रही थी पर हटाई नहीं मैं वैसे ही जाने लगा की वो बैठी थी मेरे लैंड काफी टाइट था उस समय जससे ही मैं एक पैर उनसे आगे रखा वो मेरे लैंड को पकड़ ली मैं पीछे कमरे में हो गया और फिर वो हुस्ने लगी, मुझे अच्छा लगा पर मैं बहाना बनाने लगा “मुझे जाना है प्लीज हटो ना वह से” पर जैसे ही जाने की कोशिश करता फिर लैंड पकड़ लेती, मैंने कहा मैं भी कुछ छु दूंगा, वो बोली क्या छुओगे बताओ और फिर उसने लैंड को छु दी, मैंने उनके गाल पे चुटी काटा वो फिर मेरे लैंड को छू ली. फिर मैंने कहा आप ऐसे नहीं मानोगे, तबी वो भाग के अंदर हो गयी मैंने उनके चूची को पकड़ने की कोशिश कर रहा था पर वो इससे बचने की कोशिश कर रही थी मैंने उनको पीछेः से पकड़ के दोनों चूचियों को अपने हाथ में ले लिया उनके कपडे अस्त व्यस्त हो गए थे, वो दब्बाये जा रही थी और हुस रही थी फिर मैंने उनके गर्दन पे किश करना शुरू कर दिया मैंने कहा भाभी क्या मुझे दोगे “वो बोली हां किसी को बोलना नहीं इसके बारे में” मैंने कहा नहीं नहीं ये कोई बाोलने की बात है फिर वो कमरे से बहार आयी और इधर उधर देखि सड़क के तरफ और बहार शायद वो ये देख रही थी कोई बाहर है तो नहीं. बहार लू चल रही थी और हवा की आवाज़ आ रही थी सारे लोग अपने अपने घरो में थे.

फिर वो २ तीन मिनट में आ गयी और मुझे पकड़ के किश करने लगाई आँचल उनका जमीं पे गिर रहा था चुचिया तनी हुई थी मदहोश कर देने बाली पसीने की खुसबू उनके कांख से आ रही थी हल्का हलका पसीना उनके माथे पे था, ये पहली बार था जब किसी ने मेरे जिस्म की और लैंड को छुई थी, मेरा गाला सुख रहा था मैंने पानी पि फिर मैंने उनके टाइट गाल और नरम नरम होठ पे चुम्मा लेना शुरू किया, ऐसा लग रहा था की जन्नत में हु, मेरे लैंड में तो ऐसा लग रहा था कोई विद्युत की धरा प्रवाह हो रहा था, क्या हसीं पल था.
फिर वो वही निचे चटाई पे लेट गयी और अपने ब्लाउज का हुक खोल के पीछे से ब्रा का भी हुक खोल के अलग कर दी, दोनों बड़ी बड़ी चुचिया कैद से आज़ाद हो चूका था वो अपने होठ को अपने दातो का काट रही थी अपनी जीव्ह से अपने होठो पे फ़िर रही थी मैंने उनकी साडी को ऊपर उठा दिया वो उस समय पेंटी नहीं पहनी थी जब मैंने साडी उठाया उनका बूर (चुत) नहीं दिखाई दे रहा था जांघ से सटा हुआ था ऊपर थोड़ा थोड़ा भूरा भूरा बाल दिखा रहा था और गोल गोल जांघे, जब उनकी और देखा तो उनकी आँखे लाल हो चुकी थी चुचिया तन चुकी थी निप्पल टाइट था, मैंने दोनों पैर को अलग किया ताकि बूर की देख सके छोटा से बूर दिखा मैंने अपना लैंड निकला और उनके ऊपर लेट गया पर मेरी पहली चुदाई थी पता नहीं था कैसे डालते है फिर उन्होंने थोड़ा उठने के लिए कहा और अपनी चुडिओं की खनकती हुयी हाथो से मेरे लैंड को पकड़ के अपने बूर के मुहाने पे ले गयी और बोली चोदो.
मैंने जोर से धक्का लगाया और मेरा लौड़ा बूर के अंदर चला गया उनकी चीख निकल गयी ” हाई मैं मर गयी” कितना बड़ा लौड़ा है, आआआआआआआआह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह उह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्ह, हेेेेेेेेेेेेेेे भगवान……………… ओईईईईईईईईईईए मेरी माआआआआआआआ, मैंने अपने लैंड को अंदर बाबर करना शुरू किया और चुचिया की निप्पल को अपने दातो से दबाने लगा वो अपना दोनों हाथ ऊपर कर दी उनकी कांख की बाल दिखाई देने लगा और उस समय की सीन की आप कल्पना कर सकते है कैसी लग रही होगी. करीब १० मिनट तो चुदाई करने के बाद मैं झड़ गया क्यों वो वो काफी कामुक हो गयी थी और अपनी गांड को उठा उठा के चुदवा रही थी वो भी निढाल हो गयी और एकदम शांत हो गयी मैं भी उन्ही के ऊपर पड़ा रहा फिर थोड़ी देर बाद उठा दोनों ने एक दूसरे को किश किया फिर आज तक कभी मौका नहीं मिला चोदने का क्यों की उसके बाद उनकी सास आ गयी और मैं भी पढ़ाई करने के लिए शहर चला गया अब तो जब भी मैं गाँव जाता हु एक हलकी सी मुस्कान देती है, ये मेरी सच्ची कहानी है,

Wednesday, 29 June 2016

कॉल सेण्टर का बाथरूम-Hindi sexy Story

कॉल सेण्टर का बाथरूम-Hindi sexy Story
कॉल सेण्टर का बाथरूम-Hindi sexy Story
मेरी उम्र 25 साल है, दिल्ली का रहने वाला हूँ और मैं एक जिगोलो हूँ। जिगोलो का मतलब आप लोग जानते ही होंगे कि जो पैसे के लिए फुद्दी की चुदाई करते हैं। या यों कहिये पेशेवर चुदाईखोर !
मेरा कद 6 फ़ीट, सीना 38 और रंग गोरा, काले बाल, नीली आँखें, देखने में एक माडल जैसा हूँ।
मुझे ग्राहक ढूंढने में ज्यादा परेशानी नहीं होती है, पर कभी- कभी ऐसा भी होता है कि दस दिन तक भी कोई नहीं मिलती। तब मुझे अपनी तन की प्यास बुझाने के लिए हाथ का सहारा लेना पड़ता है। मैं बहुत मोटे लण्ड का स्वामी हूँ, मेरा लण्ड नौ इंच और दो इंच मोटा है जो 20 साल से लेकर 40 साल तक की लड़की की चूत को पानी पानी कर देता है।
मैंने अपनी तारीफ कुछ ज्यादा ही कर दी। अब कहानी पर आते हैं यों तो अपनी जिंदगी में चूत ही सब कुछ है मगर मैं आपको बताना चाहता हूँ कि मैं इतना बड़ा चुदाई खोर बना कैसे।
बात जब की है जब मैं जॉब के लिए घर से पहली बार निकला था। मेरे माँ बाप ने मुझे बहुत संभाल कर रखा था। मुझे सही-गलत की पहचान नहीं थी, मेरी जॉब एक कॉल सेंटर में लग गई। मुझे रात की शिफ्ट में काम करना अच्छा लगता था क्योंकि दिन में मैं अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता था।
मेरी उम्र उस समय 21 साल थी, रात की शिफ्ट में दो लड़के और चार लड़कियाँ ही काम करते थे। कॉल सेण्टर छोटा था और हमारी छोटी छोटी ब्रांच ही हुआ करती थी।
एक रात जब मैं बाथरूम जा रहा था तो मुझे लेडिज़ बाथरूम से आह आह आह की आवाज सुनाई दी, मैं शुरु से ही गर्म किस्म का था और चूत के सपने देखा करता था। मैं गर्म हो गया, मैं जब गर्म हो जाता हूँ तो किसी की नहीं सुनता, मैंने अपने कदम लेडिज़ बाथरूम की तरफ बढ़ा दिये। मैंने चुपके से झांक कर देखा कि मंजू मैडम और अंकित सर एक दूसरे को चूम रहे थे, दोनों के कपड़े अलग पड़े हुए थे।
मेरा लण्ड फनफ़ना कर खड़ा हो गया और मैं बाहर खड़े होकर मुठ्ठी मारने लगा। अंकित सर मंजू मैम की चूत चाट रहे थे और मैम जोर-जोर से आह आह आह की आवाज निकाल रही थी। मुझे यह सब देख कर बहुत मज़ा आ रहा था।
मंजू मैम की उम्र 25 और अंकित सर 27 के रहे होंगे। बहुत सेक्सी थी मैम।
मैंने जब से उन्हें देखा बस उन्हें याद करके ही मुठ मारता था। उनकी चूची ! हाय क्या थी ! उनके गाल, उनकी गाण्ड तो इतनी प्यारी थी कि मेरा बहुत मन करता था उनकी गाण्ड मारने का।
मैं उनके सेक्स को देख कर मज़े ले ही रहा था कि तभी मोना जो मेरे साथ काम करती थी मेरे पास आ गई- हेलो, क्या कर रहे हो?
मेरी पैंट खुली थी और मेरा लण्ड मेरे हाथ में, मैंने पेंट बन्द करनी चाही तो उसने झट से पकड़ लिया- इसे ऐसे नहीं छुपा सकोगे ! मैंने देख लिया तो अब तो यह मेरा है !
उसने इतने प्यार से कहा कि मैं उसका दीवाना हो गया, मैं बहुत गर्म था और उसने मेरा लण्ड हाथ में ले रखा था। अब आप लोग सोच सकते हो कि मेरी क्या हालत होगी। क्योंकि आप अपना लण्ड हाथ में पकड़ कर बैठे हो तो आपकी क्या हालत हो रही है?
कसम से मैं बता नहीं सकता मुझे क्या हुआ। मैंने मोना के ओंठ चूसना शुरु कर दिए और उसके कपड़े उतारने लगा। मोना भी भूखी शेरनी की तरह मेरा साथ दे रही थी।
उस दिन ऑफिस में हम चार लोग ही थे, दो बाथरूम के अन्दर और दो बाथरूम के बाहर।
मैं अंकित सर, मंजू मैम को भूल गया और अब सिर्फ मोना याद थी, मोना को लेकर मैं जेंट्स बाथरूम में चला गया।
मोना मुझे चूम रही थी और मैं मोना को। हम निर्वस्त्र थे। मोना की चूचियाँ कमाल थी, बड़े संतरे की तरह गोल।
चूत तो बिलकुल गुलाब की तरह गुलाबी।
मैं मोना को पैर से लेकर सिर तक चाट रहा था और वो बाथरूम के फ़र्श पर पड़ी आह.... आह .... आह.... की आवाज निकाल रही थी।
मैंने मोना के कान में धीरे से कहा- चूस लो !
और उसने मेरा लौड़ा पकड़ कर अपने मुँह में भर लिया। मुझे बहुत मज़ा आया, गर्म-गर्म जीभ जब मेरे लौड़े पर लगी तो मैं पागल सा हो गया।वो मेरे लण्ड को चूस रही थी और मैं उसके बालों को सहला रहा था। वो चूसती रही और मुझे मज़ा आता रहा। काश वो पल हमेशा के लिए ठहर जाता, उसका लण्ड चूसना क्या था। शायद पहली बार किसी ने चूसा था इसलिए पता नहीं पर वो मज़ा आज तक नहीं आया, न ही अब कोई वो मज़ा दे पायेगा।
मैं कभी उसके बालों में कभी उसकी पीठ पर हाथ फेर रहा था।
अब उसने मुझे चूत की तरफ इशारा किया, मैं समझ गया, बहुत सी फिल्में देख चुका था मगर किया पहली बार था। मुझे पता नहीं था कि सेक्स में इतना मज़ा आता है। मैं उसकी चूत की तरफ झुका और उसके पेट को चूम लिया।
उसने आह की आवाज निकाली और बोली- चूसो न !तड़प रही है बेचारी....
मैंने जैसे ही अपने ओंठ उसकी फुद्दी पर रखे, वो अहह ....अहह.... की आवाज करने लगी।
मुझे बड़ा मज़ा आ रहा था उसकी चूत चाटने में ! गुलाबी चूत और उस पर एक भी बाल नहीं। क्या पानी था चूत का, मैं सारा पानी चाट गया। क्या चूत थी उसकी ! मैं चूत को चाटते-चाटते उसकी चूची भी मसल रहा था और वो बड़े प्यार से मेरे सिर पर हाथ फेर रही थी।
फिर उसने कहा- जल्दी डालो, मैं झड़ जाऊँगी ! जल्दी डालो।
मैं उठा और अपना लण्ड उसकी चूत पर रखा, मगर वो बोल उठी- यार यह तो बहुत मोटा है, नहीं जायेगा।
मैंने कहा- चला जायेगा।
मैंने उसे प्यार से चूमा और अपना लण्ड उसकी चूत के सामने रख कर धक्का मारा मेरा लण्ड उसकी चूत मैं ऐसे चला गया जैसे सुई में धागा !
मैंने उसकी चुदाई की मगर मुझे महसूस हुआ कि मेरा लण्ड छोटा था।
उसने उसके बाद मुझसे कभी सेक्स नहीं किया मगर मुझे एक बात परेशान कर रही थी कि मेरा लण्ड शायद ओरों से छोटा था इसीलिए उसे मज़ा नहीं आया।
मुझे पता था कि वो और लोगो से भी चुद चुकी है, उसने मुझे कुछ नहीं कहा मगर मैं सब समझ गया।
दोस्तो, मेरी पहली चुदाई ने मुझे अपना लण्ड का आकार याद दिलाया और फिर मैंने लण्ड को मोटा और लम्बा करने के बारे में सोचा। आज मैं एक जिगोलो हूँ, और मेरा लण्ड नौ इंच का है जिसे सह पाना हर किसी के बस की बात नहीं..
मैं जिगोलो कैसे बना और मेरा लण्ड मोटा कैसे हुआ, मैं यह आगे की कहानी में बताऊंगा।
मुझे मेल जरूर करना। आपके मेल ही दिल की सच्चाई बांटने पर मजबूर करते हैं।

सेक्स की देवी थी मेरी अम्मी

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम इशिका सिहं है और में दिल्ली की रहने वाली हूँ और यहीं पर एक कॉलेज की स्टूडेंट हूँ। मेरे पापा पंजाबी हैं और मम्मी हिमाचल से हैं। दोस्तों मुझे जब भी समय मिलता है। मुझे इस साईट सभी कहानियाँ बहुत सेक्सी लगती है और अच्छी भी.. लेकिन दोस्तों यह मेरी पहली कहानी है और आप सभी का ज्यादा समय ना खराब ना करते हुए में अपनी कहानी पर आती हूँ। दोस्तों मेरी मम्मी की उम्र करीब 42 साल की है और वो फिर भी बहुत सेक्सी और हॉट है। वैसे आप लोग तो जानते ही हैं आर्मी ऑफिसर्स की वाईफ कैसी दिखती हैं और कितनी बनठन कर रहती हैं। मेरी मम्मी का फिगर 39-31-42 है और वो लंबी हैं जो कि उनके जैसे बॉम्ब को बहुत सूट करता है। वो बहुत गोरी हैं और मोटी नहीं है।
दोस्तों में सेक्स के बारे में समझने लगी थी। मेरे पापा आर्मी ऑफिसर हैं और ज्यादातर टाईम व्यस्त ही रहते हैं और मम्मी घर पर बोर होती थी तो उन्होंने एक दिन पापा को कहा कि क्यों ना वो आर्मी स्कूल के बच्चो को पढ़ाने लगे? तो पापा ने भी कहा कि ठीक है.. अगर वो चाहती है तो ठीक है.. लेकिन मुझे यह अच्छा नहीं लगा.. क्योंकि कौन सी स्टूडेंट चाहेगी कि उसकी मम्मी उसकी क्लास या स्कूल में पढ़ाए? लेकिन मम्मी से बात करने के बाद वो कहने लगी कि तुम बिल्कुल भी चिंता मत करो में प्राइमरी के छोटे बच्चो को पढ़ाउंगी।
फिर में भी बहुत खुश हो गयी क्योंकि प्राइमरी बच्चो का बिल्डिंग अलग था और मम्मी को वहाँ पर जॉब लेने में कोई भी दिक्कत नहीं हुई.. लेकिन अगले सोमवार से वो हमारी क्लास टीचर बन गयी थी और हमे पढ़ाती थी.. लेकिन मुझे बहुत दुःख हुआ उनके ऐसा करने से क्योंकि अब में अपने साथ बैठने वाले लड़के का लंड कैसे हिलती और चूसती.. क्योंकि मम्मी मुझे लड़के के साथ देखकर मुझसे नाराज हुआ करती.. अभी मुझे लंड चूसने का चस्का नया नया ही लगा था और में यह बहुत मजे से कर रही थी।
फिर एक दिन मैंने अपने उस बॉयफ्रेंड को बताया कि में उसके साथ नहीं बैठ सकती। तो वो मुझसे बिना कुछ कहे दूर हो गया और दूसरी लड़कियों पर ट्राई मारने लगा.. लेकिन सभी ने छी गंदा कहकर उसे मना कर दिया और उनमे से एक ने मम्मी से शिकायत कर दी.. लेकिन मम्मी ने कुछ नहीं किया तो में बहुत चकित रह गई। वो लड़का जिसका नाम रोहन था.. वो अब क्लास में ही मुठ मारा करता था और जब मैंने उससे पूछा तो उसने कहा कि में तेरी मम्मी को देखकर क्लास में मूठ मारता हूँ।
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फिर एक दिन मम्मी ने उसे इस हालत में देख लिया जब उसका वीर्य निकलने ही वाला था। तो मम्मी ने हम सभी से कहा कि अच्छा तुम सब यह सवाल हल करो और इसी बीच जब सभी बच्चे सवाल हल कर रहे थे.. तो वो रोहन के पास गयी और उन्होंने रोहन को जल्दी से अपना लंड अंडरवियर में डालते हुए देख लिया और उसे अपने ऑफिस में बुलाया। फिर में साईन्स की क्लास के टाईम पर बहुत डर गयी कि कहीं यह मम्मी को मेरे बारे में तो नहीं बता देगा और इसलिए बचने के लिए में जब साइन्स की क्लास थी तब में क्लास से निकल कर मम्मी के ऑफिस के पीछे पहुंची जो कि थोड़ा सुनसान एरिया था और ऑफिस के पीछे बहुत छोटी छोटी खिड़कियाँ थी।
फिर में मम्मी के ऑफिस वाली खिड़की से अंदर देखने लगी और उस साईड कोई नहीं आता था क्योंकि वहाँ पर बहुत सी काँटे वाली झाड़ियां थी और में बहुत डर रही थी कि पता नहीं क्या होगा? लेकिन मम्मी ने रोहन को कहा कि छोटे शैतान यहाँ पर आओ और यह बताओ क्या कर रहे थे? तो रोहन डर के मारे बोल नहीं पा रहा था। मम्मी ने उसे समझाया कि यह सब कुछ सामान्य है और अब तुम बड़े हो रहे हो.. लेकिन तुम क्या सोचकर क्लास में मुठ मार रहे थे? क्लास में यह सब करना तो बिल्कुल ग़लत है। रोहन मम्मी के मुहं से यह सुनकर थोड़ा मस्त हो गया और उसने कहा कि मेडम आपको देखकर ही मार रहा था.. सॉरी मेडम आगे से नहीं करूँगा। तो मम्मी ने कहा कि रोहन मुझे तुम्हारे माता-पिता को बताना पड़ेगा कि तुम स्कूल में क्या पढ़ रहे हो? तो रोहन डर के मारे सॉरी कहने लगा।
फिर मम्मी उठकर दरवाजे के पास गयी और उन्होंने दरवाजा अंदर से लॉक कर दिया और रोहन को रोता देख मम्मी हंसने लगी और कहने लगी कि अच्छा तो फिर मुझे अपनी लुल्ली दिखा.. अगर चाहते हो कि तुम्हारे माता पिता को में कुछ भी ना बताऊँ। तो रोहन पहले तो शरमाया.. लेकिन फिर उसने कहा कि मेडम लुल्ली नहीं यह लंड है। फिर मम्मी ने कहा कि वो तो देखते है अभी क्या है? और मम्मी ने उसकी बेल्ट पकड़ कर उसको अपनी ओर खींचा और उसकी पेंट उतारी और मम्मी कहने लगी कि सज़ा तो तुम्हे मिलेगी रोहन। फिर मम्मी ने कहा कि रोहन अब तुम्हे में दिखाती हूँ मज़ा क्या होता है? और मम्मी ने रोहन का लंड देखा जो कि बहुत ज़्यादा कड़क हो गया था और बहुत मोटा था। भले ही वो ज्यादा लंबा ना हो.. मम्मी ने उसके लंड को एक उंगली से पूरा सहलाया और फिर लंड पर पकड़ बनाकर जोर से पकड़ लिया।
फिर एक हाथ से रोहन की छोटी सी गांड पकड़ कर दबाने लगी और दूसरे हाथ से उसका लंड जो कि छोटा था और वो लंड हिलाने लगी। रोहन आअहह उह्ह्ह कर रहा था और फिर मम्मी ने उसका लंड जीभ से चाटा फिर अपनी जीभ से रोहन के सुपाड़े को धीरे धीरे से सहलाने लगी। रोहन ने अपने चूतड़ टाईट कर लिए और मम्मी के मुहं की तरफ लंड से झटका मारा.. मम्मी के होंठ पर लंड ने दवाब दिया। तो मम्मी ने कहा कि बड़े बैताब हो रहे हो रोहन.. तुम्हारी यही तो सज़ा है कि में तुम्हे बहुत तड़पाऊँ। मम्मी ने फिर अपने मुहं में उसका लंड भर लिया और चूसने लगी.. मम्मी कभी कभी उसका लंड दाँत से काट रही थी जिससे वो ओउउच अया अह्ह्ह कर रहा था और मम्मी रोहन की गांड पर नाख़ून से खरोंच रही थी।
यह सिलसिला करीब 10 मिनट तक चला और रोहन अब पूरे जोश में आ गया और मम्मी के बाल पकड़ कर उनके मुहं में जोर जोर से पूरे जोश के साथ धक्के मारने लगा और मम्मी के मुहं को रोहन अब सज़ा दे रहा था। मम्मी के बाल जो कि चोटी में थे.. अब खुल गये और रोहन ने मम्मी के बाल घोड़े की पूंछ की तरह पकड़ लिए और उसने मम्मी के प्यारे से चहरे को बहुत चोदा और फिर कुछ ही मिनट में रोहन ने अपना गाढ़ा वीर्य मम्मी के मुहं में ही छोड़ दिया और फिर मम्मी ने अपने होंठ से बहते हुए वीर्य को होंठ से साफ करके चाट लिया और रोहन को पूछा कि क्यों मज़ा आया? तो रोहन ने कहा कि बहुत मज़ा आया मेडम आप दुनिया की बेस्ट टीचर हो.. मुझे प्लीज़ हमेशा ऐसी ही सज़ा देती रहना और फिर रोहन ने मम्मी की गर्दन पर किस किया और वापस क्लास जाने लगा और जाने से पहले मम्मी ने उसे कहा कि छुट्टी के बाद मेरे ऑफिस में आना और सज़ा चाहिए तो और उसकी गांड पर थप्पड़ मारते हुए उसे जाने को कहा ।

Seal ki bhabi ki cuta kholi - Bhabi and dewar pussy licking stories

हैल्लो दोस्तों.. आज में आप सभी लोगों से साथ एक अपनी एक सच्ची प्राईवेट बात शेयर करने जा रहा हूँ जिसे शायद आप पड़कर सोचोगे कि काश आपको भी ऐसा अवसर मिले. दोस्तों में भी सेक्स कहानियो का बहुत बड़ा फेन हूँ और मुझे सेक्स करने और इस पर सेक्सी कहानियाँ पढ़ने में बहुत मज़ा आता है. दोस्तों मेरी शादी 2003 में जयपुर में एक बहुत अच्छे पारिवर में हुई और मेरी बीवी बहुत सुंदर और मस्त जवानी वाली और सेक्सी है. उसे कोई भी देखकर चोदने की इच्छा कर सकता है.. क्योंकि उसके बड़े बड़े बूब्स, पतली कमर, बड़ी गांड, गदराया हुआ बदन उसके कामुक जिस्म की सुन्दरता को और भी बड़ा देता है. दोस्तों मेरी शादी के बाद मेरे साले अरविंद की शादी 2004 में हुई और उसके लिए लड़की देखने हम दौसा गये. दोस्तों उस लकड़ी का नाम मोनिका है और वो लड़की बहुत ही सेक्सी थी.. पतली दुबली, बड़े बूब्स, अच्छी खासी गांड.. लेकिन वो हमारे साले साहब को पसंद नहीं आई क्योंकि वो बहुत ही तेज स्वभाव की थी.. लेकिन घर वालों के आगे उसे भी हाँ करनी पड़ी और साले की शादी के बाद उन दोनों में कुछ ही दिन बात बनी और वो दोनों अक्सर किसी ना किसी बात को लेकर हमेशा बहुत लड़ते थे.

तो एक दिन उन दोनों में फिर से लड़ाई हो गई और मोनिका अपने भाई के घर चली गई. फिर जब में और मेरी बीवी उसका हाल चाल पूछने उसके घर गये तो में उसके कमरे में गया तो मैंने देखा कि वहाँ पर एक लिफाफा पड़ा था और वो किस्मत से मेरे हाथ लगा.. उसने जो अपनी सहेली को लिखा था और उसे पढने के बाद मेरे होश उड़ गये.. उसने उस कागज़ पर लिखा था कि अरविंद उसे एक मर्द का पूरा सुख नहीं दे पता जो कि औरत को मिलना चाहिए और उसने अपनी सहेली को लिखा कि जिस तरह से एक औरत को मर्द शादी के बाद चोदता है वैसे वो आज भी उस चुदाई के लिए तरस रही है और यहाँ तक कि उसने कभी उसके बूब्स भी नहीं चूमे और ना ही कभी चूत को किस किया और वो 2-3 मिनट के बाद ही पानी छोड़ देता है और थककर सो जाता है.. में आज तक उससे उस चुदाई की उम्मीद में अब बहुत थक चुकी हूँ.

दोस्तों मैंने उस पेपर को पूरा पढ़कर किसी को बताने की जगह उसे अपनी जेब में रख लिया और किसी को कुछ भी नहीं बताया.. यहाँ तक की मेरी अपनी बीवी को भी कुछ नहीं बताया और कुछ देर वहाँ पर रुकने के बाद हम दोनों वहाँ से चले आए और उसके बाद मुझे अपनी बीवी से पता चला कि अरविंद अपनी बीवी को समझाकर घर ले जा चुका है. फिर कुछ दिनों के बाद मेरे सास ससुर चार धाम की यात्रा पर चले गये और मुझे किसी काम से तीन दिन के लिए जयपुर जाना था और जब में जयपुर घर पहुँचा. तो मैंने देखा कि मोनिका घर पर अकेली थी और उससे पूछने पर पता चला कि अरविंद एक सप्ताह के लिए बीकानेर गया हुआ है. मोनिका ने सलवार सूट पहन रखा था और मैंने मोनिका से पूछा कि आज तुम सलवार सूट में कैसे हो? तो वो बोली कि क्यों क्या में आपको इसमे अच्छी नहीं लगती? तो मैंने कहा कि नहीं मुझे तो हर तरह से तुम वो दिखती हो. वो बोली कि क्या दिखती हूँ बोलो ना? तो मैंने कहा कि सेक्सी? वो सुनकर एकदम हंस पड़ी और अपने कमरे में चली गई.

वो गर्मी का समय था और में दोपहर में सो गया.. शाम को चार बजे मोना चाय लेकर आई और मेरे पास बेड पर बैठकर मेरी नाक पकड़ कर मुझसे बोली कि उठिए ना जीजू क्या और कुछ बात नहीं करेंगे अपनी साली से? तो में एकदम नींद में डरकर उठा और उठते वक्त मेरा सर उसके मुलायम बड़े बड़े बूब्स को छुता हुआ निकला और मुझे बहुत अच्छा लगा.. लेकिन उसने मुझसे कुछ नहीं कहा. फिर में बिना बनियान के सो रहा था और मैंने अपनी बनियान इधर उधर देखी.. लेकिन मुझे आस पास कहीं भी नहीं दिखी. तभी मोनिका बोली कि आप तो बिना बनियान के भी बनियान में लगते हो. तो मैंने बोला कि वो कैसे? तो वो हंसकर बोली कि आपकी छाती के बाल बहुत बड़े-बड़े हैं और बिल्कुल वनमानुष की तरह है.. क्या यह आपकी बीवी के नहीं चुभते? तो मैंने सेक्सी स्माईल के साथ पूछा कि क्यों उसे क्यों चुभेगें? तो वो बोली कि अब आप ज्यादा मत बनो और उसके इतना कहने पर मैंने उसे अपनी बाहों में भर लिया और बड़े पर पटककर उसके होंठो को पागलों की तरह किस करने लगा.. उन्हे चूसने लगा. तो वो बोली आप अपनी नियत अपने साले की बीवी पर रखते हो.. जीजू यह बहुत गलत बात है.

फिर मैंने बोला कि तुम भी तो अपनी नियत मुझ पर रखती हो मेरी जान और मैंने मौका देखकर उससे उसकी दिल की बाद पूछ ली. मैंने उससे कहा कि मोना में तुमसे एक बात पूछना चाहता हूँ. तो वो बोली कि हाँ पूछो क्या पूछना चाहते हो? तो मैंने कहा कि तुमने एक दिन एक खत अपनी सहेली को लिखा था कि तुम अरविन्द से सेक्स में संतुष्ट नहीं हो क्या यह बात सच है? तो वो बोली कि अगर में संतुष्ट होती तो क्या आपके चूमने, चाटने, बाहों में जकड़ने पर नाराज़ नहीं होती? फिर उसका इतना कहना था कि मैंने उसे फिर से अपनी बाहों में लेकर चुम्बन शुरू कर दिया और मोना भी मस्त होकर मुझे किस पर किस देने लगी. फिर मैंने अपना पाजामा खोल दिया और उसकी साड़ी और ब्लाउज भी उतार दिया वो अब मेरे सामने सिर्फ़ काली कलर की ब्रा में थी और में उसके बूब्स के आकार को देखकर पागल हो गया और हम दोनों 10 मिनट तक एक दूसरे को चूमते रहे और सेक्सी सिसकियों से उत्तेजित होते रहे.

फिर मैंने जैसे ही मोना के पेटिकोट में हाथ डाला तो मोना बोली कि जीजाजी आज की रात में एक नई सुहागरात आपके साथ मानना चाहती हूँ और अभी कुछ ऐसा मत करना. फिर मैंने भी उसकी बात मान ली और रात को हम खाना खाने बाहर गये और आते समय एक किलो गुलाब के फूल लिए और घर पर आए. मोना ने बिस्तर पर नई बेडशीट बिछा दी और मैंने पूरे एक किलो गुलाब के फूल बिस्तर पर डाल दिए. फिर करीब आघे घंटे बाद मोना एक लाल सेक्सी पेटिकोट ब्लाउज पहनकर कमरे में आई.. वो क्या चीज़ दिख रही थी उसके बड़े बड़े बूब्स मस्त लग रहे थे और में सिर्फ वी आकार की अंडरवियर में था. फिर मोना बिस्तर पर लेट गई और में भी उसके साथ लेटकर उसे चूमने लगा और उसके होंठो को किस करने लगा. तभी मोना ने अपना एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया और बोली कि यह कितना बड़ा है इसको छूने से लगता है कि यह कोई डंडा है. तो मैंने कहा कि जान आज चुदवाएगी तब पता चलेगा और मैंने मोना को पूरी तरहा से नंगा कर दिया.. उसकी क्या मस्त चूत थी? में उसकी देखते ही पागल हो गया और उसकी मस्त जवानी देखकर अपनी बीवी की चूत से बराबरी करने लगा.

वाह क्या मस्त चूत थी साली की? में उसकी चूत को किस करने लगा ही था कि वो बोली कि नहीं आज मेरी बारी है और मुझे खड़ा करके मेरा लंड चूसने लगी.. उसने लंड को बड़ी मस्ती से चूसा जिससे में सिसकियाँ ले रहा था आईईईई अहह मेरी जान मेरा लंड चूस ले ओइईईई और फिर वो पर लेट गई और में उसकी चूत को चाटने लगा. क्या मस्त थी वो.. फिर करीब 30 मिनट तक चूत चूसने के बाद उसकी चुदाई का समय हो गया. तो वो मस्त होकर लेट गई और में अपना लंड उसके दोनों पैरों के बीच रखकर उसे दबाने लगा.. वो गरम हो रही थी. तो उसने मुझे लंड चूत में डालने के लिए कहा और मेरे 8 इंच का लंड खड़ा हो गया और फिर मैंने उसके दोनों पैरों को पूरा खोल दिया और लंड को चूत पर रखकर डालने लगा और फिर जैसे ही लंड अंदर गया तो मैंने महसूस किया कि मोना की चूत शायद अब तक एकदम कुँवारी थी और मेरे धीरे धीरे धक्के से ही वो रोने लगी और उसकी चूत से कुछ खून भी निकला और में धक्के देने लगा. तो वो मुझे अपनी बाहों में जकड़ कर मुझसे चुदवाने लगी उसने मेरी कमर पर अपने नाख़ून से मुझे खरोंचा और वो कह रही थी कि जीजू प्लीज धीरे करो और मस्त होकर मेरे लंड का मज़ा ले रही थी और शायद आज मोना अपनी पहली पूरी चुदाई का मज़ा ले रही थी और बोल रही थी कि आह्ह्ह उह्ह्ह आज चोद जीजाजी और चोद मुझे और इसी लंड से जीजी भी चुदती होगी.. जीजी धन्य है जो रोज तेरा लंड लेती है.

तो मैंने कहा कि मेरी रानी तू भी तो आज इस लंड को ले रही है और यह कहकर मैंने 40-50 धक्के लगा दिए और अब मोना चुदने को तैयार थी और मैंने भी एक ही बार में पूरा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया और फिर कुछ देर बाद मोना भी झड़ गई. करीब 20 मिनट तक हम दोनों वैसे ही पड़े रहे. तभी मोना उठी और बाथरूम में जाकर अपनी चूत धोने लगी में भी उसके पीछे-पीछे चला गया और फिर से उसे चूमने लगा.. पानी हम दोनों के शरीर पर गिर रहा था. फिर मैंने मोना से कहा कि तुम्हारी चूत पर इतने बाल है इसे साफ क्यों नहीं कर लेती? तो वो बोली कि आप ही करो ना जीजू.. मैंने तुरंत रेज़र लिया और साबुन मसलकर उसकी चूत के बाल साफ कर दिए और बाल हटने के बाद चूत और भी मस्त लग रही थी और हम दोनों भीगे हुए कमरे में जाने लगे तो मोना डाईनिंग टेबल पर से पानी की बॉटल लेकर पानी पीने लगी और मैंने मौका देखकर उसकी गांड में लंड लगा दिया.

तो मोना को बहुत अच्छा लगा इसलिए उसने विरोध नहीं किया और मैंने मोना से कहा कि में उसे एक बार डाईनिंग टेबल पर चोदना चाहता हूँ और फिर मेरे इतना कहने पर मोना तैयार थी. फिर मैंने उसे डाईनिंग टेबल पर लेटा दिया और उसकी चूत पर फ़्रीज़ से मक्खन लाकर लगाया और थोड़ा उसके बूब्स पर भी मसल दिया और ज़ोर से उसके बूब्स को मसलने, चूसने लगा और फिर ज़ोर से लंड उसकी चूत में डालकर धक्के लगाने लगा. तो मेरे हर धक्के से मोना ज़ोर ज़ोर से चिल्ला रही थी अहह उईईईईई माँ मर गई उईईईई और में उसके दोनों बूब्स को मसल रहा था और फिर में झड़ने लगा और मैंने बहुत सारा वीर्य उसकी चूत में डाल दिया. यह मेरी पहले से भी ज्यादा जबर्दस्त चुदाई थी.. अब हम दोनों नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर सो गये.

फिर मोना सुबह 5 बजे उठी.. उसने जैसे ही लाईट चालू की तो में भी उठ गया और मैंने देखा कि मोना पूरी नंगी थी और वो अपनी ब्रा पहन रही थी. तभी मैंने उसे फिर से बिस्तर पर खींच लिया और फिर से उसको चूमने लगा. अब शायद मोना चुदने को तैयार नहीं थी इसलिए उसने मना कर दिया और उठकर अपने कपड़े पहनकर चली गयी. करीब 7 बजे मोना बाथरूम में नहाने चली गई.. लेकिन उसने दरवाजा बंद नहीं किया और में भी उसके पीछे पीछे अंदर चला गया और फिर देखा कि मोना एकदम नंगी होकर नहा रही थी और शावर का पानी उसके बूब्स से गिरकर चूत से होता हुआ नीचे जा रहा था. फिर मोना मेरे लंड को देखकर उसे अपनी चूत से रगड़ने लगी और मैंने मोना को गोद में लेकर फिर से एक बार लंड उसकी चूत में डाल दिया. करीब 30 मिनट तक मैंने उसकी चूत में धक्के दिए और फिर झड़ गया. फिर मोना और हम दोनों नहाकर बाहर निकले और अगली रात का प्रोग्राम बनाया. दोस्तों इन तीन दिनों में मैंने उसकी चूत को चुदाई का पूरा सुख दिया. मैंने उसको दिन रात जब भी मौका मिला चोदा. तो दोस्तों यह थी मेरी कहानी .

Sunday, 19 June 2016

मजेदार हिंदी कहानी का खजाना

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लड़की को पटाने के टोटके-How to cheat with woman

लड़की को पटाने के टोटके-How to cheat with woman

मेरा एक ई-मित्र है तरुण ! बस ऐसे ही जान पहचान हो गई थी। वो मेरी कहानियों का बड़ा प्रशंसक था। उसे किसी लड़की को पटाने के टोटके पता करने थे। एक दिन जब मैं अपने मेल्स चेक कर रहा था तो उस से चाट पर बात हुई थी। फिर तो बातों ये सिलसला चल ही पड़ा। यह कहानी उसके साथ हुई बातों पर आधारित है। लीजिये उसकी जबानी सुनिए :

दोस्तों मेरा नाम तरुण है। 20 साल का हूँ। कॉलेज में पढता हूँ। पिछले साल गर्मियों की छुट्टियों में मैं अपने नानिहाल अमृतसर घूमने गया हुआ था। मेरे मामा का छोटा सा परिवार है। मेरे मामाजी रुस्तम सेठ 45 साल के हैं और मामी सविता 42 के अलावा उनकी एक बेटी है कनिका 18 साल की। मस्त क़यामत बन गई है अब तो अच्छे-अच्छो का पानी निकल जाता है उसे देख कर। वो भी अब मोहल्ले के लौंडे लपाडों को देख कर नैन मट्टका करने लगी है।



एक बात खास तौर पर बताना चाहूँगा कि मेरे नानाजी का परिवार लाहोर से अमृतसर 1947 में आया था और यहाँ आकर बस गया। पहले तो सब्जी की छोटी सी दूकान ही थी पर अब तो काम कर लिए हैं। खालसा कॉलेज के सामने एक जनरल स्टोर है जिसमें पब्लिक टेलीफ़ोन, कंप्यूटर और नेट आदि की सुविधा भी है। साथ में जूस बार और फलों की दूकान भी है। अपना दो मंजिला मकान है और घर में सब आराम है। किसी चीज की कोई कमी नहीं है। आदमी को और क्या चाहिए। रोटी कपड़ा और मकान के अलावा तो बस सेक्स की जरुरत रह जाती है।

मैं बचपन से ही बहुत शर्मीला रहा हूँ मुझे अभी तक सेक्स का ज्यादा अनुभव नहीं था। बस एक बार बचपन में मेरे चाचा ने मेरी गांड मारी थी। जब से जवान हुआ था अपने लंड को हाथ में लिए ही घूम रहा था। कभी कभार नेट पर सेक्सी कहानियां पढ़ लेता था और ब्लू फिल्म भी देख लेता था। सच पूछो तो मैं किसी लड़की या औरत को चोदने के लिए मरा ही जा रहा था। मामाजी और मामी को कई बार रात में चुदाई करते देखा था। वाह… 42 साल की उम्र में भी मेरी मामी सविता एक दम जवान पट्ठी ही लगती है। लयबद्ध तरीके से हिलते मोटे मोटे नितम्ब और गोल गोल स्तन तो देखने वालों पर बिजलियाँ ही गिरा देते हैं। ज्यादातर वो सलवार और कुरता ही पहनती है पर कभी कभार जब काली साड़ी और कसा हुआ ब्लाउज पहनती है तो उसकी लचकती कमर और गहरी नाभि देखकर तो कई मनचले सीटी बजाने लगते हैं। लेकिन दो दो चूतों के होते हुए भी मैं अब तक प्यासा ही था।

जून का महीना था। सभी लोग छत पर सोया करते थे। रात के कोई दो बजे होंगे। मेरी अचानक आँख खुली तो मैंने देखा मामा और मामी दोनों ही नहीं हैं। कनिका बगल में लेटी हुई है। मैं नीचे पेशाब करने चला गया। पेशाब करने के बाद जब मैं वापस आने लगा तो मैंने देखा मामा और मामी के कमरे की लाईट जल रही है। मैं पहले तो कुछ समझा नहीं पर हाईई ओह … या … उईई … की हलकी हलकी आवाज ने मुझे खिड़की से झांकने को मजबूर कर दिया। खिड़की का पर्दा थोड़ा सा हटा हुआ था।

अन्दर का दृश्य देख कर तो मैं जड़ ही हो गया। मामा और मामी दोनों नंगे बेड पर अपनी रात रंगीन कर रहे थे। मामा नीचे लेटे थे और मामी उनके ऊपर बैठी थी। मामा का लंड मामी की चूत में घुसा हुआ था और वो मामा के सीने पर हाथ रख कर धीरे धीरे धक्के लगा रही थी और आह… उन्ह…। या … की आवाजें निकाल रही थी। उसके मोटे मोटे नितम्ब तो ऊपर नीचे होते ऐसे लग रहे थे जैसे कोई फ़ुटबाल को किक मार रहा हो। उनकी चूत पर उगी काली काली झांटों का झुरमुट तो किसी मधुमक्खी के छत्ते जैसा था।

वो दोनों ही चुदाई में मग्न थे। कोई 8-10 मिनट तक तो इसी तरह चुदाई चली होगी। पता नहीं कब से लगे थे। फिर मामी की रफ्तार तेज होती चली गई और एक जोर की सीत्कार करते हुए वो ढीली पड़ गई और मामा पर ही पसर गई। मामा ने उसे कस कर बाहों में जकड़ लिया और जोर से मामी के होंठ चूम लिए।

“सविता डार्लिंग ! एक बात बोलूं ?”

“क्या ? “

“तुम्हारी चूत अब बहुत ढीली हो गई है बिलकुल मजा नहीं आता ?”

“तुम गांड भी तो मार लेते हो वो तो अभी भी टाइट है ना ?”

“ओह तुम नहीं समझी ?”

“बताओ ना ?”

“वो तुम्हारी बहन बबिता की चूत और गांड दोनों ही बड़ी मस्त थी ? और तुम्हारी भाभी जया तो तुम्हारी ही उम्र की है पर क्या टाइट चूत है साली की ? मज़ा ही आ जाता है चोद कर”

“तो ये कहो ना कि मुझ से जी भर गया है तुम्हारा ?”

“अरे नहीं सविता रानी ऐसी बात नहीं है दरअसल मैं सोच रहा था कि तुम्हारे छोटे वाले भाई की बीवी बड़ी मस्त है। उसे चोदने को जी करता है ?”

“पर उसकी तो अभी नई नई शादी हुई है वो भला कैसे तैयार होगी ? “

“तुम चाहो तो सब हो सकता है ?”

“वो कैसे ?”

“तुम अपने बड़े भाई से तो पता नहीं कितनी बार चुदवा चुकी हो अब छोटे से भी चुदवा लो और मैं भी उस क़यामत को एक बार चोद कर निहाल हो जाऊं !”

“बात तो तुम ठीक कह रहे हो, पर अविनाश नहीं मानेगा ?”

“क्यों ?”

“उसे मेरी इस चुदी चुदाई भोसड़ी में भला क्या मज़ा आएगा ?”

“ओह तुम भी एक नंबर की फुद्दू हो ! उसे कनिका का लालच दे दो ना ?”

“कनिका … ? अरे नहीं. वो अभी बच्ची है !”

“अरे बच्ची कहाँ है ! पूरे अट्ठारह साल की तो हो गई है ? तुम्हें अपनी याद नहीं है क्या ? तुम तो केवल सोलह साल की ही थी जब हमारी शादी हुई थी और मैंने तो सुहागरात में ही तुम्हारी गांड भी मार ली थी !”

“हाँ ये तो सच है पर ….”

“पर क्या ?”

“मुझे भी तो जवान लंड चाहिए ना ? तुम तो बस नई नई चूतों के पीछे पड़े रहते हो मेरा तो जरा भी ख़याल नहीं है तुम्हें ?”

“अरे तुमने भी तो अपने जीजा और भाई से चुदवाया था ना और गांड भी तो मरवाई थी ना ?”

“पर वो नए कहाँ थे मुझे भी नया और ताजा लंड चाहिए बस कह दिया ?”

“ओह… तुम तरुण को क्यों नहीं तैयार कर लेती ? तुम उसके मज़े लो और मैं कनिका की सील तोड़ने का मजा ले लूँगा !”

“पर वो मेरे सगे भाई की औलाद हैं क्या यह ठीक रहेगा ?”

“क्यों इसमें क्या बुराई है ?”

“पर वो… नहीं ..। मुझे ऐसा करना अच्छा नहीं लगता !”

“अच्छा चलो एक बात बताओ जिस माली ने पेड़ लगाया है क्या उसे उस पेड़ के फल खाने का हक नहीं होना चाहिए ? या जिस किसान ने इतने प्यार से फसल तैयार की है उसे उस फसल के अनाज को खाने का हक नहीं मिलना चाहिए ? अब अगर मैं अपनी इस बेटी को चोदना चाहता हूँ तो इसमें क्या गलत है ? “

“ओह तुम भी एक नंबर के ठरकी हो। अच्छा ठीक है बाद में सोचेंगे ?”

और फिर मामी ने मामा का मुरझाया लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगी। मैं उनकी बातें सुनकर इतना उत्तेजित हो गया था कि मुट्ठ मारने के अलावा मेरे पास अब कोई और रास्ता नहीं बचा था। मैं अपना 7 इंच का लंड हाथ में लिए बाथ रूम की ओर बढ़ गया। फिर मुझे ख़याल आया कनिका ऊपर अकेली है। कनिका की ओर ध्यान जाते ही मेरा लंड तो जैसे छलांगें ही लगाने लगा। मैं दौड़ कर छत पर चला आया।

कनिका बेसुध हुई सोई थी। उसने पीले रंग की स्कर्ट पहन रखी थी और अपनी एक टांग मोड़े करवट लिए सोई थी। स्कर्ट थोड़ी सी ऊपर उठी थी। उसकी पतली सी पेंटी में फ़सी उसकी चूत का चीरा तो साफ़ नजर आ रहा था। पेंटी उसकी चूत की दरार में घुसी हुई थी और चूत के छेद वाली जगह गीली हुई थी। उसकी गोरी गोरी मोटी जांघें देख कर तो मेरा जी करने लगा कि अभी उसकी कुलबुलाती चूत में अपना लंड डाल ही दूँ।

मैं उसके पास बैठ गया। और उसकी जाँघों पर हाथ फेरने लगा। वाह.. क्या मस्त मुलायम संग-ए-मरमर सी नाज़ुक जांघें थी। मैंने धीरे से पेंटी के ऊपर से ही उसकी चूत पर अंगुली फिराई। वो तो पहले से ही गीली थी। आह … मेरी अंगुली भी भीग सी गई। मैंने उस अंगुली को पहले अपनी नाक से सूंघा। वाह क्या मादक महक थी। कच्चे नारियल जैसी जवान चूत के रस की मादक महक तो मुझे अन्दर तक मस्त कर गई। मैंने अंगुली को अपने मुंह में ले लिया। कुछ खट्टा और नमकीन सा लिजलिजा सा वो रस तो बड़ा ही मजेदार था।

मैं अपने आप को कैसे रोक पाता। मैंने एक चुम्बन उसकी जाँघों पर ले ही लिया। वो थोडा सा कुनमुनाई पर जगी नहीं। अब मैंने उसके उरोज देखे। वह क्या गोल गोल अमरुद थे। मैंने कई बार उसे नहाते हुए नंगा देखा था। पहले तो इनका आकार नींबू जितना ही था पर अब तो संतरे नहीं तो अमरुद तो जरूर बन गए हैं। गोरे गोरे गाल चाँद की रोशनी में चमक रहे थे। मैंने एक चुम्बन उन पर भी ले लिया। मेरे होंठों का स्पर्श पाते ही कनिका जग गई और अपनी आँखों को मलते हुए उठ बैठी।

“क्या कर रहे हो भाई?” उसने उनिन्दी आँखों से मुझे घूरा।

“वो. वो… मैं तो प्यार कर रहा था ?”

“पर ऐसे कोई रात को प्यार करता है क्या ? “

“प्यार तो रात को ही किया जाता है ?” मैंने हिम्मत करके कह ही दिया।

उसके समझ में पता नहीं आया या नहीं। फिर मैंने कहा,”कनिका एक मजेदार खेल देखोगी ?”

“क्या ?” उसने हैरानी से मेरी और देखा।

“आओ मेरे साथ !” मैंने उसका बाजू पकड़ा और सीढ़ियों से नीचे ले आया और हम बिना कोई आवाज किये उसी खिड़की के पास आ गए। अन्दर का दृश्य देख कर तो कनिका की आँखें फटी की फटी ही रह गई। अगर मैंने जल्दी से उसका मुंह अपनी हथेली से नहीं ढक दिया होता तो उसकी चीख ही निकल जाती। मैंने उसे इशारे से चुप रहने को कहा। वो हैरान हुई अन्दर देखने लगी।

मामी घोड़ी बनी फर्श पर खड़ी थी और अपने हाथ बेड पर रखे थे। उनका सिर बेड पर था और नितम्ब हवा में थे। मामा उसके पीछे उसकी कमर पकड़ कर धक्के लगा रहे थे। उन 8 इंच का लंड मामी की गांड में ऐसे जा रहा था जैसे कोई पिस्टन अन्दर बाहर आ जा रहा हो। मामा उनके नितम्बों पर थपकी लगा रहे थे। जैसे ही वो थपकी लगाते तो नितम्ब हिलने लगते और उसके साथ ही मामी की सीत्कार निकलती,”हाईई और जोर से मेरे राजा और जोर से आज सारी कसर निकाल लो और जोर से मारो मेरी गांड बहुत प्यासी है ये हाईई …”

“ले मेरी रानी और जोर से ले … या … सऽ विऽ ता… आ.. आ ……” मामा के धक्के तेज होने लगे और वो भी जोर जोर से चिलाने लगे।

पता नहीं मामा कितनी देर से मामी की गांड मार रहे थे। फिर मामा मामी से जोर से चिपक गए। मामी थोड़ी सी ऊपर उठी। उनके पपीते जैसे स्तन नीचे लटके झूल रहे थे। उनकी आँखें बंद थी। और वह सीत्कार किये जा रही थी,”जियो मेरे राजा मज़ा आ गया !”

मैंने धीरे धीरे कनिका के वक्ष मसलने शुरू कर दिए। वो तो अपने मम्मी पापा की इस अनोखी रासलीला देख कर मस्त ही हो गई थी। मैंने एक हाथ उसकी पेंटी में भी डाल दिया। उफ़ … छोटे छोटे झांटों से ढकी उसकी बुर तो कमाल की थी। नीम गीली। मैंने धीरे से एक अंगुली से उसके नर्म नाज़ुक छेद को टटोला। वो तो चुदाई देखने में इतनी मस्त थी कि उसे तो तब ध्यान आया जब मैंने गच्च से अपनी अंगुली उसकी बुर के छेद में पूरी घुसा दी।

“उईई माँ ….” उसके मुंह से हौले से निकला। “ओह … भाई ये क्या कर रहे हो ?” उसने मेरी ओर देखा। उसकी आँखें बोझिल सी थी और उनमें लाल डोरे तैर रहे था। मैंने उसे बाहों में भर लिया और उसके होंठों को चूम लिया।

हम दोनों ने देखा कि एक पुच्क्क की आवाज के साथ मामा का लंड फिसल कर बाहर आ गया और मामी बेड पर लुढ़क गई। अब वहाँ रुकने का कोई मतलब नहीं रह गया था। हम एक दूसरे की बाहों में सिमटे वापस छत पर आ गए।

“कनिका ? “

“हाँ… भाई ?”

कनिका के होंठ और जबान कांप रही थी। उसकी आँखों में एक नई चमक थी। आज से पहले मैंने कभी उसकी आँखों में ऐसी चमक नहीं देखी थी। मैंने फिर उसे अपनी बाहों में भर लिया और उसके होंठ चूसने लगा। उसने भी बेतहाशा मुझे चूमना शुरू कर दिया। मैंने धीरे धीरे उसके स्तन भी मसलने चालू कर दिए। जब मैंने उसकी पेंटी पर हाथ फिराया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते कहा,”नहीं भाई… इस से आगे नहीं !”

“क्यों क्या हुआ ? “

“मैं रिश्ते में तुम्हारी बहन लगती हूँ, भले ही ममेरी ही हूँ पर आखिर हूँ तो बहन ही ना ? और भाई और बहन में ऐसा नहीं होना चाहिए !”

“अरे तुम किस ज़माने की बात कर रही हो ? लंड और चूत का रिश्ता तो कुदरत ने बनाया है। लंड और चूत का सिर्फ एक ही रिश्ता होता है और वो है चुदाई का। ये तो केवल तथाकथित सभ्य कहे जाने वाले समाज और धर्म के ठेकेदारों का बनाया हुआ ढकोसला (प्रपंच) है। असल में देखा जाए तो ये सारी कायनात ही इस प्रेम रस में डूबी है जिसे लोग चुदाई कहते हैं।” मैं एक ही सांस में कह गया।

“पर फिर भी इंसान और जानवरों में फर्क तो होता है ना ?”

“जब चूत की किस्मत में चुदना ही लिखा है तो फिर लंड किसका है इससे क्या फर्क पड़ता है ? तुम नहीं जानती कनिका तुम्हारा ये जो बाप है अपनी बहन, भाभी, साली और सलहज सभी को चोद चुका है और ये तुम्हारी मम्मी भी कम नहीं है। अपने देवर, जेठ, ससुर, भाई और जीजा से ना जाने कितनी बार चुद चुकी है और गांड भी मरवा चुकी है ?”

कनिका मेरी ओर मुंह बाए देखे जा रही थी। उसे ये सब सुनकर बड़ी हैरानी हो रही थी ” नहीं भाई तुम झूठ बोल रहे हो ? “

“देखो मेरी बहना तुम चाहे कुछ भी समझो ये जो तुम्हारा बाप है ना वो तो तुम्हें भी भोगने के चक्कर में है ? मैंने अपने कानों से सुना है !”

“क … क्या … ?” उसे तो जैसे मेरी बातों पर यकीन ही नहीं हुआ। मैंने उसे सारी बातें बता दी जो। आज मामा मामी से कह रहे थे। उसके मुंह से तो बस इतना ही निकला “ओह… नोऽऽ ?”

“बोलो … तुम क्या चाहती हो अपनी मर्जी से प्यार से तुम अपना सब कुछ मुझे सौंप देना चाहोगी या फिर उस 45 साल के अपने खडूश और ठरकी बाप से अपनी चूत और गांड की सील तुड़वाना चाहती हो … बोलो ?”

“मेरी समझ में तो कुछ नहीं आ रहा है ?”

“अच्छा एक बात बताओ ?”

“क्या ?”

“क्या तुम शादी के बाद नहीं चुदवाओगी ? या सारी उम्र अपनी चूत नहीं मरवाओगी ?”

“नहीं पर ये सब तो शादी के बाद की बात होती है ?”

“अरे मेरी भोली बहना ! ये तो खाली लाइसेंस लेने वाली बात है। शादी विवाह तो चुदाई जैसे महान काम को शुरू करने का उत्सव है। असल में शादी का मतलब तो बस चुदाई ही होता है !”

“पर मैंने सुना है कि पहली बार में बहुत दर्द होता है और खून भी निकलता है ? “

“अरे तुम उसकी चिंता मत करो ! मैं बड़े आराम से करूँगा ! देखना तुम्हें बड़ा मज़ा आएगा !”

“पर तुम गांड तो नहीं मारोगे ना ? पापा की तरह ?”

“अरे मेरी जान पहले चूत तो मरवा लो ! गांड का बाद में सोचेंगे !” और मैंने फिर उसे बाहों में भर लिया।

उसने भी मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया। वह क्या मुलायम होंठ थे, जैसे संतरे की नर्म नाज़ुक फांकें हों। कितनी ही देर हम आपस में गुंथे एक दूसरे को चूमते रहे। अब मैंने अपना हाथ उसकी चूत पर फिराना चालू कर दिया। उसने भी मेरे लंड को कस कर हाथ में पकड़ लिया और सहलाने लगी। लंड महाराज तो ठुमके ही लगाने लगे। मैंने जब उसके उरोज दबाये तो उसके मुंह से सीत्कार निकालने लगी। “ओह…। भाई कुछ करो ना ? पता नहीं मुझे कुछ हो रहा है !”

उत्तेजना के मारे उसका शरीर कांपने लगा था साँसें तेज होने लगी थी। इस नए अहसास और रोमांच से उसके शरीर के रोएँ खड़े हो गए थे। उसने कस कर मुझे अपनी बाहों में जकड़ लिया।

अब देर करना ठीक नहीं था। मैंने उसकी स्कर्ट और टॉप उतार दिए। उसने ब्रा तो पहनी ही नहीं थी। छोटे छोटे दो अमरुद मेरी आँखों के सामने थे। गोरे रंग के दो रस कूप जिनका एरोला कोई एक रुपये के सिक्के जितना और निप्पल्स तो कोई मूंग के दाने जितने बिलकुल गुलाबी रंग के। मैंने तड़ से एक चुम्बन उसके उरोज पर ले लिया। अब मेरा ध्यान उसकी पतली कमर और गहरी नाभि पर गया।

जैसे ही मैंने अपना हाथ उसकी पेंटी की ओर बढ़ाया तो उसने मेरा हाथ पकड़ते हुए कहा,”भाई तुम भी तो अपने कपड़े उतारो ना ?”

“ओह… हाँ ?”

मैंने एक ही झटके में अपना नाईट सूट उतार फेंका। मैंने चड्डी और बनियान तो पहनी ही नहीं थी। मेरा 7 इंच का लंड 120 डिग्री पर खड़ा था। लोहे की रॉड की तरह बिलकुल सख्त। उस पर प्री-कम की बूँद चाँद की रोशनी में ऐसे चमक रही थी जैसे शबनम की बूँद हो या कोई मोती।

“कनिका इसे प्यार करो ना ?”

“कैसे ? “

“अरे बाबा इतना भी नहीं जानती? इसे मुंह में लेकर चूसो ना ?”

“मुझे शर्म आती है ?”

मैं तो दिलो जान से इस अदा पर फ़िदा ही हो गया। उसने अपनी निगाहें झुका ली पर मैंने देखा था कि कनखियों से वो अभी भी मेरे तप्त लंड को ही देखे जा रही थी बिना पलकें झपकाए।

मैंने कहा,”चलो, मैं तुम्हारी बुर को पहले प्यार कर देता हूँ फिर तुम इसे प्यार कर लेना ?”

“ठीक है !” भला अब वो मना कैसे कर सकती थी।

और फिर मैंने धीरे से उसकी पेंटी को नीचे खिसकाया :

गहरी नाभि के नीचे हल्का सा उभरा हुआ पेडू और उसके नीचे रेशम से मुलायम छोटे छोटे बाल नजर आने लगे। मेरे दिल की धड़कने बढ़ने लगी। मेरा लंड तो सलामी ही बजाने लगा। एक बार तो मुझे लगा कि मैं बिना कुछ किये-धरे ही झड़ जाऊँगा। उसकी चूत की फांकें तो कमाल की थी। मोटी मोटी संतरे की फांकों की तरह। गुलाबी चट्ट। दोनों आपस में चिपकी हुई। मैंने पेंटी को निकाल फेंका। जैसे ही मैंने उसकी जाँघों पर हाथ फिराया तो वो सीत्कार करने लगी और अपनी जांघें कस कर भींच ली।

मैं जानता था कि यह उत्तेजना और रोमांच के कारण है। मैंने धीरे से अपनी अंगुली उसकी बुर की फांकों पर फिराई। वो तो मस्त ही हो गई। मैंने अपनी अंगुली ऊपर से नीचे और फिर नीचे से ऊपर फिराई। 3-4 बार ऐसा करने से उसकी जांघें अपने आप चौड़ी होती चली गई। अब मैंने अपने दोनों हाथों से उसकी बुर की दोनों फांकों को चौड़ा किया। एक हलकी सी पुट की आवाज के साथ उसकी चूत की फांकें खुल गई।

आह. अन्दर से बिलकुल लाल चुर्ट। जैसे किसी पके तरबूज की गिरी हो। मैं अपने आप को कैसे रोक पाता। मैंने अपने जलते होंठ उन पर रख दिए। आह … नमकीन सा नारियल पानी सा खट्टा सा स्वाद मेरी जबान पर लगा और मेरी नाक में जवान जिस्म की एक मादक महक भर गई। मैंने अपनी जीभ को थोड़ा सा नुकीला बनाया और उसके छोटे से टींट (मदनमणि) पर टिका दिया। उसकी तो एक किलकारी ही निकल गई। अब मैंने ऊपर से नीचे और नीचे से ऊपर जीभ फिरानी चालू कर दी। उसने कस कर मेरे सिर के बालों को पकड़ लिया। वो तो सीत्कार पर सीत्कार किये जा रही थी।

बुर के छेद के नीचे उसकी गांड का सुनहरा छेद उसके कामरज से पहले से ही गीला हो चुका था। अब तो वो भी खुलने और बंद होने लगा था। कनिका आंह … उन्ह … कर रही थी। ऊईई … मा..आ… एक मीठी सी सीत्कार निकल ही गई उसके मुंह से।

अब मैंने उसकी बुर को पूरा मुंह में ले लिया और जोर की चुस्की लगाई। अभी तो मुझे 2 मिनट भी नहीं हुए होंगे कि उसका शरीर अकड़ने लगा और उसने अपने पैर ऊपर करके मेरी गर्दन के गिर्द लपेट लिए और मेरे बालों को कस कर पकड़ लिया। इतने में ही उसकी चूत से काम रस की कोई 4-5 बूँदें निकल कर मेरे मुंह में समां गई। आह क्या रसीला स्वाद था। मैंने तो इस रस को पहली बार चखा था। मैं उसे पूरा का पूरा पी गया।

अब उसकी पकड़ कुछ ढीली हो गई थी। पैर अपने आप नीचे आ गए। 2-3 चुस्कियां लेने के बाद मैंने उसके एक उरोज को मुंह में ले लिया और चूसना चालू कर दिया। शायद उसे इन उरोजों को चुसवाना अच्छा नहीं लगा था। उसने मेरा सिर एक और धकेला और झट से मेरे खड़े लंड को अपने मुंह में ले लिया। मैं तो कब से यही चाह रहा था। उसने पहले सुपाड़े पर आई प्री कम की बूँदें चाटी और फिर सुपाड़े को मुंह में भर कर चूसने लगी जैसे कोई रस भरी कुल्फी हो।

आह … आज किसी ने पहली बार मेरे लंड को ढंग से मुंह में लिया था। कनिका ने तो कमाल ही कर दिया। उसने मेरा लंड पूरा मुंह में भरने की कोशिश की पर भला सात इंच लम्बा लंड उसके छोटे से मुंह में पूरा कैसे जाता।

मैं चित्त लेटा था और वो उकडू सी हुई मेरे लंड को चूसे जा रही थी। मेरी नजर उसकी चूत की फांकों पर दौड़ गई। हलके हलके बालों से लदी चूत तो कमाल की थी। मैंने कई ब्लू फिल्मों में देखा था की चूत के अन्दर के होंठों की फांके 1.5 या 2 इंच तक लम्बी होती हैं पर कनिका की तो बस छोटी छोटी सी थी। बिलकुल लाल और गुलाबी रंगत लिए। मामी की तो बिलकुल काली काली थी। पता नहीं मामा उन काली काली फांकों को कैसे चूसते हैं।

मैंने कनिका की चूत पर हाथ फिराना चालू कर दिया। वो तो मस्त हुई मेरे लंड को बिना रुके चूसे जा रही थी। मुझे लगा अगर जल्दी ही मैंने उसे मना नहीं किया तो मेरा पानी उसके मुंह में ही निकल जाएगा और मैं आज की रात बिना चूत मारे ही रह जाऊँगा। मैं ऐसा हरगिज नहीं चाहता था।

मैंने उसकी चूत में अपनी अंगुली जोर से डाल दी। वो थोड़ी सी चिहुंकी और मेरे लंड को छोड़ कर एक और लुढ़क गई।

वो चित्त लेट गई थी। अब मैं उसके ऊपर आ गया और उसके होंठों को चूमने लगा। एक हाथ से उसके उरोज मसलने चालू कर दिए और एक हाथ से उसकी चूत की फांकों को मसलने लगा। उसने भी मेरे लंड को मसलना चालू कर दिया। अब लोहा पूरी तरह गर्म हो चुका था और हथोड़ा मारने का समय आ गया था। मैंने अपने उफनते हुए लंड को उसकी चूत के मुहाने पर रख दिया। अब मैंने उसे अपने बाहों में जकड़ लिया और उसके गाल चूमने लगा। एक हाथ से उसकी कमर पकड़ ली। इतने में मेरे लंड ने एक ठुमका लगाया और वो फिसल कर ऊपर खिसक गया।

कनिका की हंसी निकल गई।

मैंने दुबारा अपने लंड को उसकी चूत पर सेट किया और उसके कमर पकड़ कर एक जोर का धक्का लगा दिया। मेरा लंड उसके थूक से पूरा गीला हो चुका था और पिछले आधे घंटे से उसकी चूत ने भी बेतहाशा कामरज बहाया था। मेरा आधा लंड उसकी कुंवारी चूत की सील को तोड़ता हुआ अन्दर घुस गया।

इसके साथ ही कनिका की एक चीख हवा में गूंज गई। मैंने झट से उसका मुंह दबा दिया नहीं तो उसकी चीख नीचे तक चली जाती।

कोई 2-3 मिनट तक हम बिना कोई हरकत किये ऐसे ही पड़े रहे। वो नीचे पड़ी कुनमुना रही थी। अपने हाथ पैर पटक रही थी पर मैंने उसकी कमर पकड़ रखी थी इस लिए मेरा लंड बाहर निकालने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। मुझे भी अपने लंड के सुपाड़े के नीचे जहां धागा होता है जलन सी महसूस हुई। ये तो मुझे बाद में पता चला कि उसकी चूत की सील के साथ मेरे लंड की भी सील (धागा) टूट गई है। चलो अच्छा है अब आगे का रास्ता दोनों के लिए ही साफ़ हो गया है। हम दोनों को ही दर्द हो रहा था। पर इस नए स्वाद के आगे ये दर्द भला क्या माने रखता था।

“ओह … भाई मैं तो मर गई रे ….” कनिका के मुंह से निकला “ओह … बाहर निकालो मैं मर जाउंगी !”

“अरे मेरी बहना रानी ! बस अब जो होना था हो गया है। अब दर्द नहीं बस मजा ही मजा आएगा। तुम डरो नहीं ये दर्द तो बस 2-3 मिनट का और है उसके बाद तो बस जन्नत का ही मजा है !”

“ओह. नहीं प्लीज. बाहर… निका … लो … ओह… या… आ…. उन्ह … या…”

मैं जानता था उसका दर्द अब कम होने लगा है और उसे भी मजा आने लगा है। मैंने हौले से एक धक्का लगाया तो उसने भी अपनी चूत को अन्दर से सिकोड़ा। मेरा लंड तो निहाल ही हो गया जैसे। अब तो हालत यह थी कि कनिका नीचे से धक्के लगा रही थी। अब तो मेरा लंड उसकी चूत में बिना किसी रुकावट अन्दर बाहर हो रहा था। उसके कामरज और सील टूटने से निकले खून से सना मेरा लंड तो लाल और गुलाबी सा हो गया था।

“उईई . मा .. आह .. मजा आ रहा है भाई तेज करो ना .. आह ओर तेज या …” कनिका मस्त हुई बड़बड़ा रही थी।

अब उसने अपने पैर ऊपर उठा कर मेरी कमर के गिर्द लपेट लिए थे। मैंने भी उसका सिर अपने हाथों में पकड़ कर अपने सीने से लगा लिया और धीरे धीरे धक्के लगाने लगा। जैसे ही मैं ऊपर उठता तो वो भी मेरे साथ ही थोड़ी सी ऊपर हो जाती और जब हम दोनों नीचे आते तो पहले उसके नितम्ब गद्दे पर टिकते और फिर गच्च से मेरा लंड उसकी चूत की गहराई में समां जाता। वो तो मस्त हुई आह उईई माँ. ही करती जा रही थी। एक बार उसका शरीर फिर अकड़ा और उसकी चूत ने फिर पानी छोड़ दिया। वो झड़ गई थी। आह ……। एक ठंडी सी आनंद की सीत्कार उसके मुंह से निकली तो लगा कि वो पूरी तरह मस्त और संतुष्ट हो गई है।

मैंने अपने धक्के लगाने चालू रखे। हमारी इस चुदाई को कोई 20 मिनिट तो जरूर हो ही गए थे। अब मुझे लगाने लगा कि मेरा लावा फूटने वाला है।

मैंने कनिका से कहा तो वो बोली,”कोई बात नहीं, अन्दर ही डाल दो अपना पानी ! मैं भी आज इस अमृत को अपनी कुंवारी चूत में लेकर निहाल होना चाहती हूँ !”

मैंने अपने धक्कों की रफ़्तार बढ़ा दी और फिर गर्म गाढ़े रस की ना जाने कितनी पिचकारियाँ निकलती चली गई और उसकी चूत को लबा लब भरती चली गई। उसने मुझे कस कर पकड़ लिया। जैसे वो उस अमृत का एक भी कतरा इधर उधर नहीं जाने देना चाहती थी। मैं झड़ने के बाद भी उसके ऊपर ही लेटा रहा।

मैंने कहीं पढ़ा था कि आदमी को झड़ने के बाद 3-4 मिनट अपना लंड चूत में ही डाले रखना चाहिए इस से उसके लंड को फिर से नई ताकत मिल जाती है। और चूत में भी दर्द और सूजन नहीं आती।

थोड़ी देर बाद हम उठ कर बैठ गए। मैंने कनिका से पूछा,”कैसी लगी पहली चुदाई मेरी जान ?”

“ओह बहुत ही मजेदार थी मेरे भैया ?”

“अब भैया नहीं सैंया कहो मेरी जान ! “

“हाँ हाँ मेरे सैंया ! मेरे साजन ! मैं तो कब की इस अमृत की प्यासी थी। बस तुमने ही देर कर रखी थी !”

“क्या मतलब ?”

“ओह. तुम भी कितने लल्लू हो। तुम क्या सोचते हो मुझे कुछ नहीं पता ?”

“क्या मतलब ? ”

“मुझे सब पता है तुम मुझे नहाते हुए और मूतते हुए चुपके चुपके देखा करते हो और मेरा नाम ले ले कर मुट्ठ भी मारते हो ?”

“ओह … तुम भी ना … एक नंबर की चुद्दकड़ हो ?”

“क्यों ना बनूँ आखिर खानदान का असर मुझ पर भी आएगा ही ना ?” और उसने मेरी और आँख मार दी। और फिर आगे बोली “पर तुम्हें क्या हुआ मेरे भैया ?”

“चुप साली अब भी भैया बोलती है ! अब तो मैं दिन में ही तुम्हारा भैया रहूँगा रात में तो मैं तुम्हारा सैंया और तुम मेरी सजनी बनोगी !” और फिर मैंने एक बार उसे अपनी बाहों में भर लिया। उसे भला क्या ऐतराज हो सकता था।

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